शेयर मार्किट कोइ ऐसी चीज नहीं है जिसे समझा नहीं जा सकता है | इस में उतार और चढ़ाव लगा रहता है | शेयर मार्केट को प्रेडिक्ट किया जा सकता है, इसे एनालाइज किया जा सकता है, इसके अंदर कुछ फ़िल्टर होते हैं अगर उसे आप सीख गए तो आप अच्छा पैसा कमा सकते हैं| यह पोस्ट इन्हीं सब चीजों को जानने में आपकी मदद करेगा |
नीचे दिए गए टेबल में आप देख सकते हैं की किस-किस प्रकार के डिपॉजिट कितना रिटर्न देते हैं और कितने समय में पैसा डबल हो जाता है|
Types (प्रकार) | Return (वापसी) | Money Double (पैसा दोगुना) |
Fixed Deposits (सावधि जमा) | 5% | 14 YEARS (वर्ष) |
)Debt Fund (डेट फंड) | 5% | 14 YEARS (वर्ष) |
Real State (रियल एस्टेट) | Negative (नकारात्मक) | Negative (नकारात्मक) |
Gold (सोना) | 9% – 10% | 8 YEARS (वर्ष) |
Savings Account (बचत खाता) | 2% | 24 YEARS (वर्ष) |
Current Account (चालू खाता) | 0% | – |
Share Market | 18% – 20% | 4 YEARS (वर्ष) |
दिए गए टेबल को देखने से आपको यह तो समझ में आ ही गया होगा कि सबसे ज्यादा रिटर्न शेयर मार्केट से होता है अगर सावधानीपूर्वक और ध्यान पूर्वक इसमें पैसा लगाया जाए | शेयर मार्केट किसी प्रकार का सट्टा बाजार नहीं है इसमें कुछ फिल्टर्स होते हैं जिसके इस्तेमाल से हम सही रिटर्न ले सकते हैं |
शेयर मार्केट में दो तरह से पैसा लगाया जाता है :-
1- पहला है म्युचुअल फंड |
इसमें आपका पैसा दूसरा कोई मैनेज करता है |
2- दूसरा तरीका है कंपनी के शेयर में पैसा लगाना|
इसमें हमारे मन में पहला प्रश्न यह आता है कि किस कंपनी में पैसा लगाना है ?
कहां पर शेयर खरीदना है ?
कितना पैसा लगाना है ?
क्यों लोग फेल होते हैं ?
जैसे तमाम प्रश्न हमारे दिमाग में आते हैं |
भारत में सिर्फ 3.5 प्रतिशत लोग शेयर मार्केट में पैसा लगाते हैं | यूएस में 55 परसेंट लोग शेयर मार्केट में पैसा लगाते हैं |
भारत में पैसा क्यों नहीं लोग लगाते हैं शेयर मार्केट में ?
1 – भारत में लोग जोखिम उठाना नहीं चाहते हैं |
2 – लोगों को जानकारी की कमी होती है |
3 – किसी भी प्रकार का कोर्स उपलब्ध नहीं है |
4 – बहुत सारे फ्रॉड हो चुके हैं |
अब हम देखेंगे वह पॉइंट्स जिस की मदद से हम शेयर मार्केट में अपना पैसा लगाकर अच्छे फायदे को कमा सकते हैं :-
1 – जिस भी कंपनी में हम पैसा इन्वेस्ट कर रहे हैं उसके बिजनेस साइकिल कम से कम एक 11 साल तक को चेक कर लेना चाहिए या सरसरी निगाह से देख लेना चाहिए | इसका यह मतलब भी हुआ है कि कम से कम 11 साल पुरानी कंपनी तो जरूर होनी चाहिए | इससे हमें यह पता चल जाएगा कि खराब समय जैसे कि मंदी के समय में उस कंपनी ने कैसे मार्केट में परफॉर्म किया | क्या उसमें वह बना रह गया या टूट गया ? तो हमें ट्रेक रिकॉर्ड देखने से यह पता चल जाता है कि औसत रिटर्न कंपनी का कितना है | अगर औसत रिटर्न 50% है तो इसका मतलब यह है कि डेढ़ साल में कंपनी ने पैसे को डबल कर दिया यह जानकारी हमें उसके ट्रेक रिकॉर्ड को देखने से प्राप्त होगी |
2 – कंपनी की बढ़त जीडीपी की ठीक दुगनी होने चाहिए | मतलब यह अगर जीडीपी 8 परसेंट है तो कंपनी की बढ़त 16 परसेंट होनी चाहिए | क्योंकि देश जिस मात्रा में बढ़ रहा है उसी मात्रा में कंपनी के बढ़ने से कोई फायदा खास नहीं मिलता है | इसलिए हम उस कंपनी में पैसा लगाएंगे जोकि जीडीपी की दुगनी मात्रा से बड़ी है कम से कम |
3 – यह एक महत्वपूर्ण पॉइंट है इसमें हम यह देखते हैं कि टॉप मैनेजमेंट क्या कंपनी के प्रति ईमानदार है | किसी भी प्रकार के कानूनी कार्रवाई या केस वगैरह तो नहीं है | कंपनी में किसी प्रकार का फ्रॉड तो नहीं हुआ है | इनके ऑफिसर कितने जिम्मेदार और सिंसियर हैं अपने काम के प्रति | बीते वर्षों में क्या अचीवमेंट उनके रहे हैं |
4 – शुन्य कर्ज होना चाहिए क्योंकि जिस कंपनी के ऊपर कर्जा होता है वह अपने शेरहोल्डर्स को कम प्रॉफिट दे पाता है |
प्रमुख साइट कंपनी का डेट चेक करने के लिए :-
मनीकंट्रोल (Money Control )
कंपनी का डेट चेक करने का तरीका- फाइनेंशियल्स-> बैलेंस शीट-> यहां पर डेट चेक करें कंपनी का |
डेट 2 नाम से मिलेंगे लॉन्ग टर्म बौरोइंग (Long term Borrowings) शॉर्ट टर्म बौरोइंग्स (Short Term Borrowings) | अगर इसमें कोई अमाउंट दिया हुआ है तो इसका मतलब उस कंपनी पर कर्जा है | ऐसे कंपनियों में पैसे लगाने से हमें बचना चाहिए |
अगर डेट टो इक्विटी रेश्यो (debt to equity ratio ) जीरो होता है तो कंपनी पर किसी भी प्रकार का कोई कर्जा नहीं है |
हमें यह एक नियम हमेशा के लिए बना लेना चाहिए की कर्ज में डूबी हुई कंपनी में कभी भी पैसा नहीं लगाना चाहिए |
5 – कंपनी के मालिक की कम से कम 51% हिस्सेदारी होनी चाहिए | इसका यह मतलब है की कंपनी के मालिक के पास पावर है कंपनी में फैसला लेने के लिए | क्योंकि यह वही शख्स है जिसने कंपनी को उस मुकाम तक पहुंचाया है | अगर उसने ही अपना शेयर बेच दिया है तो उस कंपनी के आने वाली प्रोडक्ट की सफलता की कोई गारंटी नहीं होती है, जिससे कि कंपनी घाटे में जा सकती है और शेयर के दाम कम हो सकते हैं |
अगर कंपनी का प्रमोटर खुद ही कंपनी का शेयर खरीदने लगे मार्केट से तो इसका मतलब यह है की कंपनी ग्रोथ करने वाली है चुकी उसे अंदर की बात मालूम होती है इसीलिए वह कम दाम पर शेयर खरीद लेता है और महंगे दाम पर बेच देता है | ऐसे ऐसे वक्त पर हमें भी शेयर को खरीद लेना चाहिए |
6 – कंपनी का नेट प्रॉफिट कम से कम 25% होना चाहिए टैक्स देने के बाद | इसका मतलब यह है अगर कंपनी ने इस वर्ष 100 करोड़ का टर्नओवर किया है तो अगले वर्ष कम से कम 125 करोड़ का टर्नओवर होना चाहिए | अगर इसी तरीके से प्रॉफिट पड़ रहा है तो कंपनी में कोई गड़बड़ी नहीं है, सब कुछ ठीक चल रहा है, ऐसे कंपनियों में हम अपने पैसे को लगा सकते हैं |
नोट – हमें कंपनी के ट्रेंड पर पैसा लगाना है |
7 – कंपनी की कमाई और कंपनी की बिक्री दोनों 10 से 15 परसेंट कम से कम बढ़नी चाहिए | इसमें हमें यह ध्यान रखना है की कंपनी की प्रोडक्ट की संख्या की बिक्री भी बढ़नी चाहिए ना कि सिर्फ दाम बढ़ना चाहिए | क्योंकि प्रोडक्ट की बिक्री कम भी हो सकती है लेकिन दाम बढ़ाने से रिवेन्यू उतना ही बना रह सकता है जितना पिछले साल था इसमें शेरहोल्डर्स को धोखे एवं नुकसान होने की संभावना होती है| कभी-कभी कंपनियां लोन ले लेती हैं जिससे कि उनकी रिवेन्यू बढ़ जाती है और शेयर का दाम बढ़ जाता है या वह अपने किसी प्रॉपर्टी को बेच देते हैं जिससे शेयर का रेट बढ़ जाता है | ऐसी कंपनियों में घाटे होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है |
8 – ऑपरेशन के माध्यम से कंपनी में जो कैश आ रहा है वह हर साल कम से कम 20 परसेंट बढ़ना चाहिए | इसे जानने के लिए हम शेयर मार्केट के किसी भी ऐप या वेबसाइट के माध्यम से देख सकते हैं |
कंपनी में कैश 3 तरीके से आता है:-
1 – सामान बेचने पर |
2- कंपनी ने अपने एसेट या म्यूचुअल फंड को बेच दिया |
3- लोन लेने पर |
कंपनी वही अच्छी होती है इन्वेस्टमेंट के लिए जोकि बिजनेस के माध्यम से कैसे आती है ना कि लोन से |
किसी भी कंपनी के लिए तीन चीज बहुत महत्वपूर्ण होती है:-
कैश, ग्रोथ, और प्रॉफिट | यह तीनों चीजें ठीक चलनी चाहिए |
हमें ऑपरेटिंग कैश फ्लो को चेक करना चाहिए | इसका मतलब यह है कि कितना कैश खर्च हुआ और कितना कैश आया | यह हमेशा बढ़ना ही चाहिए |
9 – कुल कैपिटल पर कम से कम 20% का मुनाफा होना चाहिए | कैपिटल मतलब सभी प्रकार के पैसे के स्रोत जैसे कि लोन और शेयर इत्यादि को जोड़कर इकट्ठा किया गया पैसा जो कि कंपनी के पास है |
10 – इक्विटी पर रिटर्न कम से कम 15 परसेंट या उसके ऊपर होना चाहिए प्रतिवर्ष | इक्विटी में सिर्फ और सिर्फ शेरहोल्डर्स के पैसे होते हैं ना की किसी प्रकार के लोन के |
अगर कुछ भी ना समझ में आए तो हम सेंसेक्स में भी पैसा लगा सकते हैं | इसका औसतन रिटर्न 10 परसेंट सलाना के लगभग होता है |
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